Lockdown के चलते सड़क पर आ गए भारतीय क्रिकेट के ये गुमनाम सितारे, ऐसी जिंदगी जीने को हुए मजबूर

 

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन चल रहा है

इसमें से एक गुमनाम सितारे की मदद तो मुंबई प्रीमियर लीग के आठ खिलाड़ियों ने की

नई दिल्‍ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण पूरी दुनिया में दशहत फैली हुई है. इस खतरनाक महामारी के चलते खेल के मैदान भी सूने हो गए हैं. वायरस के कारण देश को 21 दिनों के लिए लॉकडाउन कर दिया गया है. जिसका असर खिलाड़ियों के साथ साथ उनसे जुड़े लोगों पर भी पड़ा.
इन्हीं में से एक है मुद्दसिर खान, जो मुंबई के आजाद मैदान के बाहर क्रिकेट बल्लों को सही करने का काम करते हैं अगर इस महामारी की मार नहीं पड़ती तो मुंबई का यह मैदान इस समय अनुभवी और युवा खिलाड़ियों से भरा हुआ रहता और इस समय खान कई बल्लों को सही करने में व्यस्त होते.
खान हर दिन करीब छह से सात बात बल्ले सही कर लेते थे, जिससे रोज उन्हें करीब 500 रुपये की कमाई हो जाती थी. खान ने अपने दादा के काम को आगे बढ़ाया, जो 1994 से नियमित रूप से ये काम कर रहे थे.

गेंद बेचकर कमाते थे अतिरिक्‍त पैसे इसके अलावा मोहम्मद असद शेख आजाद मैदान के यंग मोहम्मडन क्रिकेट क्लब के ग्राउंड्समैन हैं. वह अतिरिक्त कमाई के लिए गेंद भी बेचते हैं. हिंदुस्‍तान टाइम्‍स केअनुसार शेख और खान, दोनों दशकों से आजाद मैदान पर ​आने वाले नियमित सदस्य हैं. मगर अब ये दोनों ही लॉकडाउन से ठीक पहले यूपी में अपने गांव लौट गए हैं, क्योंकि मैदान में अब क्रिकेट नहीं हो रहा है. इस वजह से उन्हें हफ्तों तक कुछ कमाई नहीं हुई.
मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन एपेक्स काउंसिल के सदस्य नदीम मेमन के मुताबिक ग्राउंड्समैन हर महीने 8 से 12 हजार के बीच कमा लेते हैं. उनकी पिच पर जो निजी मैच होते हैं, उससे उन्हें थोड़ी और कमाई हो जाती है क्योंकि उन्हें इसका 25 फीसदी मिलता है. मगर अब सब बंद हो गया है. देश के सबसे अमीर खेल से जुड़े शेख और खान बिल्कुल हाशिए पर हैं. बीसीसीआई (BCCI) दुनिया का सबसे अमीर ​क्रिकेट बोर्ड है और आईपीएल ने 2018 में ही सिर्फ स्पांसरशिप रेवेन्यू से 1.5 बिलियन डॉलर कमाए थे.

इस वजह से अधिकतर खिलाड़ी, कोच, ग्राउंड्समैन और स्टाफ, जो भी बीसीसीआई से मान्यता प्राप्त हैं, उन्हें कमाई को लेकर बहुत चिंता नहीं है. मगर फ्रीलांस अंपायर, कोच, अकेदमी के मालिकों को इस लॉकडाउन की मार झेलनी पड़ रही है.

मुंबई प्रीमियर लीग के खिलाड़ियों ने की मदद
मोहम्मद असद शेख को मुंबई प्रीमियर लीग के आठ खिलाड़ियों की ओर से मदद मिली. टीम के मालिक भी ग्राउंड्समैन के लिए फंड जुटाने में लगे हुए हैं. इस​के लिए हर मालिक ने एक एक लाख रुपये की मदद की है, मगर लॉकडाउन की वजह से खान का बैट रिपेयर करने का काम ठप पड़ गया है.

प्राइवेट नेट प्रैक्टिस कराने वाले कोच के लिए भी कमाई का कोई साधन नहीं बचा है. अंधेरी ईस्ट में करीब 47 खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देने वाले रोहित भल्ला कहते हैं कि उन्होंने कारोबार में इससे ज्यादा बुरा समय कभी नहीं देखा है. वह बताते हैं कि बहुत से लोगों ने फरवरी की फीस भी नहीं दी है क्योंकि हम महीना पूरा होने पर फीस लेते हैं. सिर्फ बड़ी अकादमी में ही एडवांस में फीस देने का नियम होता है. मार्च की फीस तो छात्र खैर देंगे ही नहीं. मगर हमें कोच और ग्राउंड्समैन को तो वेतन देना ही होगा.

यह कहानी सिर्फ मुंबई की नहीं है. दिल्ली के द्वारका स्थित स्कूल में हरबीर क्रिकेट अकादमी चलाने वाले देवदत्त का कहना है कि अकादमी बंद होने पर भी वेतन समेत हमारा मासिक खर्च 60 से 70 हजार रुपये है. दिल्ली में ही किराए या लीज के मैदान में तीन कोचिंग सेंटर चलाने वाले सुरेंद्र डबास कहते हैं कि उन्हें एक महीने में 2 से ढाई लाख का नुकसान हो गया है.

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