असदुद्दीन ओवैसी ने जताई आशंका, ‘अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भी हिंसक मुहिम शुरू करेगा RSS’

असदुद्दीन ओवैसी ने साधा संघ पर निशाना.

असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने ट्वीट किया, ‘जिस बात का डर था वही हो रहा है. बाबरी मस्जिद से जुड़े फैसलों की वजह से संघ परिवार के लोगों के इरादे और भी मज़बूत हो गए हैं.’

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  • Last Updated:
    October 18, 2020, 9:44 AM IST

नई दिल्‍ली. उत्तर प्रदेश के मथुरा (Mathura) में श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर (Shri Krishna Janmsthan) में स्थित शाही ईदगाह मस्जिद (Idgah) को हटाकर संबंधित जमीन वापस उसके मालिक श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट को सौंपे जाने के अनुरोध वाली याचिका शुक्रवार को सुनवाई के लिए मंजूर कर ली गई. इस पर ऑलं इंडिया मजलिस ए इत्‍तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ पर निशाना साधा है.

असदुद्दीन ओवैसी ने विवादित बयान देते हुए ट्वीट किया, ‘जिस बात से डर था वही हो रहा है. बाबरी मस्जिद से जुड़े फैसलों की वजह से संघ परिवार के लोगों के इरादे और भी मज़बूत हो गए हैं. याद रखिए, अगर आप और हम अभी भी गहरी नींद में रहेंगे तो कुछ साल बाद संघ इस पर भी एक हिंसक मुहिम शुरू करेगी और कांग्रेस भी इस मुहिम का एक अटूट हिस्सा बनेगी.’ उन्‍होंने लोगों से संघ परिवार से सतर्क रहने को कहा है.

ओवैसी ने कहा, ‘पूजा का स्थान अधिनियम 1991, पूजा के स्थान को बदलने से मना करता है. गृह मंत्रालय को इस अधिनियम का प्रशासनिक अधिकार सौंपा गया है, इसकी प्रतिक्रिया कोर्ट में क्या होगी? शाही ईदगाह ट्रस्ट और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ने अक्टूबर 1968 में इस विवाद को हल किया. अब इसे पुनर्जीवित क्यों करें? ‘

बता दें कि लखनऊ की वकील रंजना अग्निहोत्री और छह अन्य लोगों ने सोमवार को जिला न्यायाधीश साधना ठाकुर की अदालत में यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील हरीशंकर जैन और विष्णु जैन के माध्यम से दाखिल की थी. इस पर सुनवाई करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया.

वकील जैन के अनुसार, ‘जब हम लोगों ने इस संबंध में एक याचिका मथुरा के ही दिवानी न्यायाधी (प्रवर वर्ग) की अदालत में 25 सितम्बर को दाखिल की तो वहां प्रभारी दिवानी न्यायाधीश (अपर जिला एवं त्वरित न्यायालय संख्या दो) ने 30 सितम्बर को दिए फैसले में इस तर्क के साथ याचिका खारिज कर दी कि याची न तो उक्त ट्रस्ट का सदस्य है और न ही मामले में किसी पक्ष से संबंधित है.’

उन्होंने बताया कि उसके विरुद्ध याचिकाकर्ताओं ने अपील की जिस पर फैसला देते हुए जिला न्यायाधीश ने उनकी याचिका मंजूर कर ली और अगली सुनवाई के लिए 18 नवम्बर की तिथि भी सुनिश्चित कर दी.

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